Thursday, 21 March 2019

सलाह

खाते-पीते मत हँसो, जाय नली फँस जाय।
बात बड़ो की मान लो, नाही तो पछताय।

दोहा

भाग दौड़ ऐसी मची,
मानव बना मशीन।
टूटा बंधन स्नेह का,
रिश्ता हुआ मलीन।।

नारी


क्षणिका


कुछ दोहे












दोहा


अमन चैन


झूठ


रुमाल


सत्य

सत्य वह नही
जो चला गया
सत्य वह है
जो तुममे शेष है
प्राप्ति वह है कि
समय को
नूतन आकृतियों में पकड़ो

सूर्य देव

नही द्वेष है नही भेद है नही मद दिखलाते
परोपकार में जीवन निधि को सूर्य देव है लुटाते।
प्रकृति नष्ट न करता मानव न विषम दाह बरसाते
विरहणी बन धरा विलखती व्यथा गीत खग गाते।
तुम भी सीखो हे मानव! अक्षय स्रोत बतलाते
हरियाली उपहार धरा की लोक निमित्त ही आते।
जड़ चेतन में नव जोश जगाते अपना धर्म निभाते
गहन तिमिर से लड़कर विजय पथ दिखलाते।

Friday, 23 September 2016

कविता

देख ये थी मेरी दुनिया,
हम मिलकर रहते थे।
हम सब अपने थे,
'मैं' से दूर रहते थे

Thursday, 25 August 2016

यशोदा तेरा नंदलाला

यशोदा तेरा नटखट है श्याम नंदलाला
उधम मचाते है गोकुला में निराला।।
जहा देखे वहा इनकी ही चर्चा है।
दही दूध माखन का ही तो ख़र्चा है।।
कान को पकड़ इनको नचाती ग्वाल-वाला।
यशोदा तेरा नटखट है श्याम नंदलाला।।

जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं------

Friday, 1 January 2016

नया साल आया

आप सभी को नववर्ष के शुभकामनाएं...

नया साल आया
नया है  सवेरा,
इस नूतन वर्ष में
सबका हो बसेरा |
सबका जीवन सुखमय हो
अब कोई न हो बखेड़ा |
जन-जन में घुले प्रेमरस,
क्या है तेरा क्या है मेरा |
इस नूतन किरणों के संग,
सबका हो नया सवेरा |
 

Saturday, 5 December 2015

कौन कहता बेटा-बेटी में अंतर है

कौन कहता बेटा-बेटी में अंतर है ,
लेकिन भ्रूण हत्या हो रहा निरंतर है |

बेटी तो सुख का समुन्दर है ,
स्नेह,ममता, सहनशील शब्द जैसे सुन्दर है |

व्याकरण पढ़ो भाषा शुद्ध करो

व्याकरण पढ़ो भाषा शुद्ध करो ,

मौखिक लिखित से विचार व्यक्त करो |

मौखिक में अशुद्धता है कम बोलो ,

बोलने से पहले बार -बार तोलो |

नाप - तोल सही होने पर मुख खोलो ,

बोलते हो , अर्थ कुछ और निकलता है |

अर्थ से अनर्थ होकर राजनीति में फैलता है |

वर्ण के क्रमवद्ध से वर्णमाला बनता है ,

वर्णों के सार्थक समूह से शब्द बनता है |

शब्दों के सार्थक समूह से वाक्य बनता है ,

वाक्य से ही बनता है बिगड़ता है |

मिश्रित सयुंक्त सरल वाक्य को ,

पहचानो फिर बोलो अपना मुख खोलो |

कर्तृवाच्य भाववाच्य कर्मवाच्य समझोगे ,

तब देश में प्रेम भाईचारा और एकता पाओगे |

जब एक -एक की परिभाषा समझोगे ,

तभी अकर्मक सकर्मक क्रिया पहचानोगे |