Monday, 9 December 2019

कुछ दोहे

कुर्सी के बिन अब नहीं,मिलता है आराम।
नेताओं की रात-दिन,होती नींद हराम।।

देख तमाशा चुप हुई,बैठी जनता मौन।
उनको चिंता देश की,कुर्सी बैठे कौन।।

चौपाई छंद

देख सृष्टि सर्जक है नारी,
नहीं कभी हिम्मत है हारी।
सात जनम की कसम निभाती,
बाबुल छोड़ पिया घर जाती।

मर्यादा गहना बन सजती,
जीवन को सुरभित वो करती।
संस्कार से ही घर बनता,
नारी से ही रिश्ता सजता।

माता बनकर आशीष दिया,
 पाल पोश कर वो बड़ा किया।
आँचल तो है सुख की छइया,
चार धाम है माँ के पइया।

नारी को सम्मान मिले जब,
खुशियों का फिर फूल खिले तब।
सदा लाज नारी की रखना,
लज्जा ही नारी का गहना।


कुण्डलिया

उमड़े मन के मेघ घन, मिले नहीं अब चैन।
आजा अब तो लाडली,निर्झर बरसे नैन।।
निर्झर बरसे नैन, सदा बहती जल धारा।
कुटिया है खामोश,अब न कुछ लगता प्यारा।
बेटी हो लाचार,नहीं अब जीवन उजड़े।
इससे ही संसार,प्यार बेटी पर उमड़े।

दोहा गजल

दिनांक-01/12/2019
दोहा गजल
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साँप-नेवला मत बनो , चलो न गिरगिट चाल।
मानव मन दूषित रहे ,  ऐसा रोग न पाल।।

नफरत के बाजार में , नकली है व्यवहार,
मरी पड़ी संवेदना , हुआ हाल बेहाल।

अपना  घर खुद तोड़कर , खुद ही करें विनाश,
नफरत है दिल में भरी , कैसा है ये काल।

कड़ी धूप बरसात में , मिले नहीं आराम,
 लाचारी में पेट की , बुरा सभी का हाल।

तनहा है ये जिंदगी , पल पल रहे उदास,
सब किस्मत का खेल है , या दुश्मन की चाल।

बरगद बूढ़ा हो गया , नहीं मिले अब छाँव,
सोचें दादा गाँव के , कहाँ लगे चौपाल।


अनमोल वचन

संग्रह कर तू प्रेम-धन,ये होता अनमोल।
भाई संग न बंट सके,नहीं तराजू तोल।।               

कुछ दोहे

दहशत में हैं बेटियां , कौन बचावे लाज।
ये कानून अपंग है , रोवे बेटी आज।।

हो देवी तुम न्याय की , क्यों बैठी हो मौन।
धरा त्रस्त है पाप से , इसको रोके कौन।।

आज शब्द भी मौन है , क्यों बेटी लाचार।
मरी पड़ी संवेदना , नहीं नेक व्यवहार।।


आज के हालात पर एक दोहा

हनन किया विश्वास का,करके पंख विहीन।
लाज भंग कर हत हुई,बेटी एक कुलीन।।

Wednesday, 27 March 2019

चाँद

बैठ अम्बर इठलाता चाँद
शीतल रौशनी फैलाता चाँद
चाँद चांदनी की खोज में
इधर-उधर भटकता  चाँद
फूल पत्तो पर ओस नहीं
नयन आँसू बरसाता चाँद
कितना शीतल कितना निर्मल
लेकिन कितना तन्हा चाँद

ज़िन्दगी

जिंदगी कट जायेगी यूं चलते-चलते
कभी रोते- रोते कभीहँसते-हँसते।
ख्वाब अपनी जो तुमको अगर हम सुनाते
खो जाती मगर  जिन्दगी लड़ते- लड़ते।
कुछ हम भी सुनाते कुछ तुम भी सुनाते
हम टूट जाते खुद से भी छलते- छलते।
न मैं कुछ भी कहती न तुम कुछ भी कहते
कट जायेगी जिंदगी यूं हँसते- हँसते।

माँ

माँ
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हम शब्द है
तो वो भाषा है
हम झरने है
तो वो समुन्दर है
हम छंद है
तो वो कविता है
हम लव-कुश है
तो वो सीता है
हम मस्तक है
तो वो ताज है
हम सुर है
तो वो साज है
भावना एहसास है
खुशबू का आभास है
जगत की धूरी है
उस बिन कल्पना अधूरी है
खुशियों की फुलवारी है
आनंद की किलकारी है
वो रब के जैसा है
प्रेम अपनापन ऐसा है
माँ सबसे न्यारी है
हमारे जीवन की क्यारी है
की थी अपनी खुशियां कुर्बान
माँ के लिए रखना ह्रदय में
सदा सम्मान * * * * *

Thursday, 21 March 2019

सलाह

खाते-पीते मत हँसो, जाय नली फँस जाय।
बात बड़ो की मान लो, नाही तो पछताय।

दोहा

भाग दौड़ ऐसी मची,
मानव बना मशीन।
टूटा बंधन स्नेह का,
रिश्ता हुआ मलीन।।