Monday, 9 December 2019

दोहा गजल

दोहा गजल 

1-सस्ता होता आदमी,महँगा है बाजार।
अब ऐसे हालात में,कैसे हो त्योहार।
2-मरी पड़ी संवेदना,नहीं रहा जज्बात,
बात बात पर हो गयी,बहुत बड़ी तकरार।
3-मानव मन दूषित हुआ,चलता गिरगिट चाल,
भरा छलावा आजकल,ये कैसा संसार।
4-हिंसा दहशत फूट है,रहती धुँधली शाम,
भटक रही इंसानियत,नहीं नेक किरदार।
5-जीवन ये अनमोल है,तोल न कौड़ी भाव,
नहीं करो अभिमान तुम,अपने मद को मार।

चौपाई छंद-सरस्वती वंदना

सरस्वती वंदना
चौपाई छंद
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कर जोरी विनती मैं करती।
जग के दुख तू माता हरती।।
सकल विघ्न माँ हरती रहना।
सबके मन को निर्मल करना।।

सबके हिय में उपजे अब सुख।
निकट किसी के आवे ना दुख।।
सुख समृद्धि सम्मान मिले माँ।
नित जीवन में खुशी मिले माँ।।

कृपा आपकी जो मिल जाती।
तभी छंद कुछ मैं लिख पाती।।
लय छन्दों का ज्ञान करा दो।
जन जीवन में ज्योति जगा दो।।

दिव्य रूप माँ ज्ञानदायनी।
तिमिर मिटाओ हंस वाहिनी।।
बुद्धिहीन अब नहीं रहूँ मैं।
भावों का विस्तार करू मैं।।


बालश्रम पर कुछ दोहे

1-बचपन से ये दूर है,बन बैठे मजदूर।
लाचारी ये पेट की,करती हैं मजबूर।।
2-जिन हाथों में चाहिए,पुस्तक कलम दवात।
वो गारो में सन रहा,कैसे ये हालात।।
3-होते ईश स्वरूप जो,क्यो इतने मजबूर।
श्रम शोषण से ये बचे,नहीं बने मजदूर।।

गंगा पर दोहे

गंगा
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1-गंगा, यमुना,सरस्वती,तेरा पावन धाम।
करू अर्चना आपकी,मैं तो सुबहो शाम।।
2-गंगा जीवनदायिनी,सकल जगत की मात।
दृश्य मनोरम जब मिले ;सूरज,नदी प्रभात।।
3-गंगा जल अमृत(अमरित)बने,जन जन की ये आस।
मिलकर रोके गंदगी,मन में ले विश्वास।।

मन का मीत

23/11/2019
शनिवार
कुण्डलिया

मेरा सच्चा प्यार है,मेरे मन का मीत।
सात जनम का साथ है,बनी रहे ये प्रीत।।
बनी रहे ये प्रीत,बहे सुख की अब नदियां।
कदम पड़े जिस राह,खिले फूलों की कलियां।
तुमसे ही अब नेह, हृदय में रहे बसेरा।
यही प्रेम संदेश,सदा रहना तू मेरा।

किताब पर दोहा

किताब
अक्षर अक्षर जोड़ कर,सुंदर सजी किताब।
दूर करे अज्ञानता,पूरे कर दे ख्वाब।।

किस्मत पर दोहा

कुछ दोहे

कुर्सी के बिन अब नहीं,मिलता है आराम।
नेताओं की रात-दिन,होती नींद हराम।।

देख तमाशा चुप हुई,बैठी जनता मौन।
उनको चिंता देश की,कुर्सी बैठे कौन।।

चौपाई छंद

देख सृष्टि सर्जक है नारी,
नहीं कभी हिम्मत है हारी।
सात जनम की कसम निभाती,
बाबुल छोड़ पिया घर जाती।

मर्यादा गहना बन सजती,
जीवन को सुरभित वो करती।
संस्कार से ही घर बनता,
नारी से ही रिश्ता सजता।

माता बनकर आशीष दिया,
 पाल पोश कर वो बड़ा किया।
आँचल तो है सुख की छइया,
चार धाम है माँ के पइया।

नारी को सम्मान मिले जब,
खुशियों का फिर फूल खिले तब।
सदा लाज नारी की रखना,
लज्जा ही नारी का गहना।


कुण्डलिया

उमड़े मन के मेघ घन, मिले नहीं अब चैन।
आजा अब तो लाडली,निर्झर बरसे नैन।।
निर्झर बरसे नैन, सदा बहती जल धारा।
कुटिया है खामोश,अब न कुछ लगता प्यारा।
बेटी हो लाचार,नहीं अब जीवन उजड़े।
इससे ही संसार,प्यार बेटी पर उमड़े।

दोहा गजल

दिनांक-01/12/2019
दोहा गजल
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साँप-नेवला मत बनो , चलो न गिरगिट चाल।
मानव मन दूषित रहे ,  ऐसा रोग न पाल।।

नफरत के बाजार में , नकली है व्यवहार,
मरी पड़ी संवेदना , हुआ हाल बेहाल।

अपना  घर खुद तोड़कर , खुद ही करें विनाश,
नफरत है दिल में भरी , कैसा है ये काल।

कड़ी धूप बरसात में , मिले नहीं आराम,
 लाचारी में पेट की , बुरा सभी का हाल।

तनहा है ये जिंदगी , पल पल रहे उदास,
सब किस्मत का खेल है , या दुश्मन की चाल।

बरगद बूढ़ा हो गया , नहीं मिले अब छाँव,
सोचें दादा गाँव के , कहाँ लगे चौपाल।


अनमोल वचन

संग्रह कर तू प्रेम-धन,ये होता अनमोल।
भाई संग न बंट सके,नहीं तराजू तोल।।               

कुछ दोहे

दहशत में हैं बेटियां , कौन बचावे लाज।
ये कानून अपंग है , रोवे बेटी आज।।

हो देवी तुम न्याय की , क्यों बैठी हो मौन।
धरा त्रस्त है पाप से , इसको रोके कौन।।

आज शब्द भी मौन है , क्यों बेटी लाचार।
मरी पड़ी संवेदना , नहीं नेक व्यवहार।।


आज के हालात पर एक दोहा

हनन किया विश्वास का,करके पंख विहीन।
लाज भंग कर हत हुई,बेटी एक कुलीन।।

Wednesday, 27 March 2019

चाँद

बैठ अम्बर इठलाता चाँद
शीतल रौशनी फैलाता चाँद
चाँद चांदनी की खोज में
इधर-उधर भटकता  चाँद
फूल पत्तो पर ओस नहीं
नयन आँसू बरसाता चाँद
कितना शीतल कितना निर्मल
लेकिन कितना तन्हा चाँद

ज़िन्दगी

जिंदगी कट जायेगी यूं चलते-चलते
कभी रोते- रोते कभीहँसते-हँसते।
ख्वाब अपनी जो तुमको अगर हम सुनाते
खो जाती मगर  जिन्दगी लड़ते- लड़ते।
कुछ हम भी सुनाते कुछ तुम भी सुनाते
हम टूट जाते खुद से भी छलते- छलते।
न मैं कुछ भी कहती न तुम कुछ भी कहते
कट जायेगी जिंदगी यूं हँसते- हँसते।