Friday, 27 December 2019

काल पर दोहा


वक्त वक्त का फेर है,कभी धूप तो छाँव।
परख लिया यदि काल को,कांटा लगे न पाँव।।

Thursday, 26 December 2019

मुक्तक


हो अँधेरी रात तो दीया जलाओ,
कल्पना के हाथ से मंदिर बनाओ।
देख उजड़ा हो किसी का आशियाना,
साथ मिलकर के कभी उसको बसाओ।

मंजिल पर मुक्तक


स्नेह मिला जिस राह पर,उस पथ को पहचान।
लम्बी मंजिल तय करो,बनना मत अनजान।
जीवन के इस राह पर,मत करना आराम,
नहीं मिले संघर्ष बिन मंजिल ऐ नादान।

Wednesday, 25 December 2019

चाय पर दोहा


विषय-चाय
तुलसी लौंग इलायची,अदरक देहु मिलाय।
बनती बढ़िया चाय फिर,सबके मन को भाय।।

अन्न दायिनी


अन्न दायिनी भूमि तू , तू जननी तू प्राण।
शरण दायिनी देवि तू , करती सबका त्राण।।

पंछी बैठा शाख पर


पंछी बैठा शाख पे,तन्हा और उदास।
टूटे उसके पंख है,पर जीने की आस।।

Tuesday, 24 December 2019

दोहा गीत

दिनांक-24/12/2019
मंगलवार
श्रद्धेय बलवीर सिंह रंग जी को समर्पित..
आयोजन गीत रंग महोत्सव-54
दोहा गीत
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पंछी होती मैं अगर , गाती मीठे गीत।
लोभ-द्वेष से दूर हो , करती सबसे प्रीत।।

चीं चीं चूं चूं गा रही , ऊपर बैठ मुंडेर,
सुबह जगाती है हमें , तनिक न करती देर।
छोटी है पर सीख दे , रखे समय का ध्यान,
समय लौट आता नहीं , समझो रे नादान।

लोभ-द्वेष से दूर हो , करती सबसे प्रीत।
रखती ऐसी भावना , बनती मन का मीत।

चिड़िया थकती है नहीं , गाती मीठी गान,
खुश रहती है वो सदा , है छोटी- सी जान।
खान-पान निर्मल रहे , शुद्ध हवा औ धूप,
बना रहे जब हौसला , तब निखरेगा रूप।

परहित सोचे हम सभी , सोचे हार न जीत।
लोभ-द्वेष से दूर हो , करे सभी से प्रीत।

हिम्मत उसमे गजब की , कभी न मानी हार,
तिनका तिनका जोड़ कर , दिया हवा को मार।
हासिल कर जब लक्ष्य को , किया विजय का गान,
देख हौसला सब करे , जज्बे का सम्मान।

नभ के आँगन में उडू., होकर मैं बिंदास।
जाना नभ के छोर पर , मन में ले विश्वास।

कंचन लता चतुर्वेदी
वाराणसी

Monday, 23 December 2019

मातृभूमि


विषय-मातृभूमि
मातृभूमि,वसुधा,धरा,प्यारी तेरी गोद।
नदियाँ प्रेम प्रवाह है,करता पवन विनोद।।

बादल बन आकाश में


बादल बन आकाश में,बुझा  धरा की प्यास।
कर निर्मित तुम स्वयं को,रख मन में विश्वास।।

आकाश


हो अनंत ब्रह्मांड में,बना नया आकाश।
ऊँची भरो उड़ान अब,होना नहीं निराश।।

संकल्प


भेद लक्ष्य संकल्प ले,मन में हो विश्वास।
कल में उलझे मत रहो, बना नया इतिहास।।

संकल्प


तोड़ो मत यूं कल्पना,करता समय पुकार।
सोवो मत संकल्प लो,मत जीवन से हार।।

Friday, 20 December 2019

संस्कार,सभ्यता,संकल्प

जय माँ शारदे
प्रदत्त शब्द- संकल्प,संस्कार,सभ्यता
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1-संकल्प
आओ ले संकल्प हम , रचे नया इतिहास।
कदम बढ़े सत कर्म पर , द्वेष न भटके पास।।

2-संस्कार
मात-पिता,गौ,गुरु सदा , इनका कर सम्मान।
संस्कार औ सभ्यता , भारत की पहचान।।

3-सभ्यता
लुप्त हो रही सभ्यता , बदल रहा परिवेश।
छायी है भय की घटा , ये कैसा अब देश।।

गुरु पर दोहे

जय माँ शारदे
सुमन संग वंदन करू , महिमा अपरम्पार।
 बिना गुरु नहीं ज्ञान है , समझो जीवन सार।।

विद्या धन उत्तम रहे , खर्च करे बढ़ जाय।
संचय से घटता सदा , हमको गुरु बतलाय।।

जीवन रौशन है तभी , गुरु जब देते ज्ञान।
मात-पिता,गुरु का सदा , करना तुम सम्मान।।

Thursday, 19 December 2019

भारत पर दोहा


विषय-भारत
माटी ऐसी देश की,जनम लिए भगवान।
वीर,धीर,त्यागी यहाँ, भारत देश महान।।

मीरा पर दोहा


कहती मीरा बावरी,हुई कृष्ण से प्रीत।
नहीं हृदय दूजा बसे,मेरा प्रेम पुनीत।।

Wednesday, 18 December 2019

दर्पण पर दोहा


अपना मन दर्पण बना,जमे न इस पे धूल।
समझो जीवन मोल को,करना कभी न भूल।।

धूल पर दोहा


खनिज रत्न सब हैं छुपे,इससे ही फल फूल।
ये जीवन आधार है,पानी, मिट्टी-धूल।।

Sunday, 15 December 2019

दोहा गजल

जय माँ शारदे
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मैं सूरज के साथ था , रहा दर्प से दूर।
वो जुगनू के संग में , कैसे है मगरूर।।

उपवन में देखा बहुत , खिले हुए थे फूल।
 हरते मन के शूल को , खुशियां दे भरपूर।।

अंतर मन अब साफ हो , पले हृदय में प्रेम,
सदा सत्य का साथ दो , राग द्वेष हो दूर।

जल अन्न और वायु हो , और मधुर हो बोल,
क्रोध,लोभ को दूर कर , करना नहीं गुरूर।

ऐसा अब कलयुग भयो , देख भयो उर खेद,
झूठे,लोभी लालची , मद में रहते चूर।


Saturday, 14 December 2019

धरती,आकाश,प्रदूषण

जय माँ शारदे

प्रदत्त शब्द- धरती, आकाश, प्रदूषण
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1-धरती
धरती जब बंजर बने, पड़ता तभी अकाल।
क्या होगा पानी बिना, सोचो कल का हाल।।

2-आकाश
पाँव तले खिसके धरा, पीड़ा करे प्रहार।
एक नया आकाश बन, मत जीवन से हार।।

3-प्रदूषण
धरा प्रदूषित हो रही, संकट है ये घोर।
अब तो मानव जाग तू , करे प्रदूषण शोर।।