Friday, 30 October 2020

मुक्तक

नेकी की' राह हमको' दिखाकर चले गए l
दिल से वो' द्वेष - भाव हटाकर चले गए ll
मन तो हुआ फ़कीर ये' जीवन सँवर गया l
ऐसा  हमें  महीप  बनाकर  चले गए...

Wednesday, 28 October 2020

मुक्तक

221   2122   1221  212
वो ख्वाब तो दिखाए दिखाकर चले गए।
दिल में मुझे बसाए बसाकर चले गए।
मैं देखती रही रास्ते बैठकर यहां,
समझा जिसे जिंदगी भुलाकर चले गए।

Monday, 19 October 2020

muktak

19/10/2020
सोमवार
1222.    1222.  1222

गरीबों को बसाने का हुनर सीखो।
किसी का ग़म चुराने का हुनर सीखो।
नहीं छोड़ो अकेले राह में उनको,
गले उनको लगाने का हुनर सीखो।
कंचन लता चतुर्वेदी
वाराणसी

muktk

1222-1222-1222
कलम को भी चलाने का हुनर सीखो।
नहीं कविता चुराने का हुनर सीखो।
गमों को ढाल गजलों में बहर में लिख,
उसे पढ़कर सुनाने का हुनर सीखो।
कंचन लता चतुर्वेदी
वाराणसी

Sunday, 4 October 2020

मुक्तक


1222  1222   1222  1222
जहां ईमान बिकता है वहां आचार क्या देखें।
जहां दूषित रहे परिवेश तो सत्कार क्या देखें।
नशा में लत नहीं इज्जत नहीं दिखता भला मानुष,
वहां हम प्रेम या विश्वास या अधिकार क्या देखें।