Saturday, 5 December 2015

कौन कहता बेटा-बेटी में अंतर है

कौन कहता बेटा-बेटी में अंतर है ,
लेकिन भ्रूण हत्या हो रहा निरंतर है |

बेटी तो सुख का समुन्दर है ,
स्नेह,ममता, सहनशील शब्द जैसे सुन्दर है |

एक रचना यूं ही...

तेरा दिल चुराई न होती |

पलको में ख्वाब सजाई न होती |

मुझे क्या पता रुसवा कर जाएगा,

तो माथे पर विंदिया सजाई न होती |

बहारो में खिजा आई न होती,

मेरे ख्वाबो की कालिया मुरझाई न होती |

आखो की निदिया चुराई न होती,

सपनों में सही ख्वाब सजाई तो होती |

व्याकरण पढ़ो भाषा शुद्ध करो

व्याकरण पढ़ो भाषा शुद्ध करो ,

मौखिक लिखित से विचार व्यक्त करो |

मौखिक में अशुद्धता है कम बोलो ,

बोलने से पहले बार -बार तोलो |

नाप - तोल सही होने पर मुख खोलो ,

बोलते हो , अर्थ कुछ और निकलता है |

अर्थ से अनर्थ होकर राजनीति में फैलता है |

वर्ण के क्रमवद्ध से वर्णमाला बनता है ,

वर्णों के सार्थक समूह से शब्द बनता है |

शब्दों के सार्थक समूह से वाक्य बनता है ,

वाक्य से ही बनता है बिगड़ता है |

मिश्रित सयुंक्त सरल वाक्य को ,

पहचानो फिर बोलो अपना मुख खोलो |

कर्तृवाच्य भाववाच्य कर्मवाच्य समझोगे ,

तब देश में प्रेम भाईचारा और एकता पाओगे |

जब एक -एक की परिभाषा समझोगे ,

तभी अकर्मक सकर्मक क्रिया पहचानोगे |