Wednesday, 27 March 2019

चाँद

बैठ अम्बर इठलाता चाँद
शीतल रौशनी फैलाता चाँद
चाँद चांदनी की खोज में
इधर-उधर भटकता  चाँद
फूल पत्तो पर ओस नहीं
नयन आँसू बरसाता चाँद
कितना शीतल कितना निर्मल
लेकिन कितना तन्हा चाँद

ज़िन्दगी

जिंदगी कट जायेगी यूं चलते-चलते
कभी रोते- रोते कभीहँसते-हँसते।
ख्वाब अपनी जो तुमको अगर हम सुनाते
खो जाती मगर  जिन्दगी लड़ते- लड़ते।
कुछ हम भी सुनाते कुछ तुम भी सुनाते
हम टूट जाते खुद से भी छलते- छलते।
न मैं कुछ भी कहती न तुम कुछ भी कहते
कट जायेगी जिंदगी यूं हँसते- हँसते।

माँ

माँ
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हम शब्द है
तो वो भाषा है
हम झरने है
तो वो समुन्दर है
हम छंद है
तो वो कविता है
हम लव-कुश है
तो वो सीता है
हम मस्तक है
तो वो ताज है
हम सुर है
तो वो साज है
भावना एहसास है
खुशबू का आभास है
जगत की धूरी है
उस बिन कल्पना अधूरी है
खुशियों की फुलवारी है
आनंद की किलकारी है
वो रब के जैसा है
प्रेम अपनापन ऐसा है
माँ सबसे न्यारी है
हमारे जीवन की क्यारी है
की थी अपनी खुशियां कुर्बान
माँ के लिए रखना ह्रदय में
सदा सम्मान * * * * *

Thursday, 21 March 2019

सलाह

खाते-पीते मत हँसो, जाय नली फँस जाय।
बात बड़ो की मान लो, नाही तो पछताय।

दोहा

भाग दौड़ ऐसी मची,
मानव बना मशीन।
टूटा बंधन स्नेह का,
रिश्ता हुआ मलीन।।

नारी


क्षणिका


कुछ दोहे












दोहा


अमन चैन


झूठ


रुमाल


सत्य

सत्य वह नही
जो चला गया
सत्य वह है
जो तुममे शेष है
प्राप्ति वह है कि
समय को
नूतन आकृतियों में पकड़ो

सूर्य देव

नही द्वेष है नही भेद है नही मद दिखलाते
परोपकार में जीवन निधि को सूर्य देव है लुटाते।
प्रकृति नष्ट न करता मानव न विषम दाह बरसाते
विरहणी बन धरा विलखती व्यथा गीत खग गाते।
तुम भी सीखो हे मानव! अक्षय स्रोत बतलाते
हरियाली उपहार धरा की लोक निमित्त ही आते।
जड़ चेतन में नव जोश जगाते अपना धर्म निभाते
गहन तिमिर से लड़कर विजय पथ दिखलाते।