मेरी भावनाएं.../कंचनलता चतुर्वेदी
Saturday, 4 July 2020
बिटिया पर दोहे
1-
बिटिया से दुल्हन बनी, पीहर से ससुराल।
जहाँ सभी अनजान हैं, कौन रखेगा ख्याल।।
2-
मैं आँगन की दीप थी,और खुशी का द्वार।
चली पिया के गाँव मैं, ले पीहर का प्यार।।
3-
धागा हो यदि नेह का, देता रिश्ते जोड़।
अगर बुने ये जाल तो, देता बन्धन तोड़।।
1 comment:
विश्वमोहन
4 July 2020 at 17:18
बहुत सुंदर!!
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बहुत सुंदर!!
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