Wednesday, 10 June 2020

कुण्डलिनी छंद


पूजा होती कर्म की,समझो पर की पीर।
पंछी है ये आत्मा,उड़ती छोड़ शरीर।।
उड़ती छोड़ शरीर,संग ना जाता दूजा।
यदि हो कर्म महान,जगत में होती पूजा।

Sunday, 7 June 2020

बेटियाँ


07/06/2020
चित्राक्षरी लेखन
पढ़े बढ़े अब बेटियाँ, बदले और समाज।
शान बने इस देश की,इनके सिर हो ताज।।

खुशबू है ये फूल की,सात सुरों का साज।
इंद्रधनुष-सा रूप है,ये धरती का ताज।।

ये मीठी मुस्कान हैं,लक्ष्मी का वरदान।
जिस घर से अनजान है,उस घर की पहचान।।

अगर न होती बेटियाँ, थम जाता संसार।
सृष्टि कहाँ इनके बिना,इनसे घर परिवार।।

Saturday, 6 June 2020

जीवन,सत्संग,विश्वास


दिनांक-06/ 06/ 2020
1-विश्वास
बाँध डोर विश्वास की , लेते हैं दिल जीत।
संकट में जो साथ दे , वो हैं सच्चे मीत।।

2-सत्संग
निर्मल मन,प्रमुदित हृदय , पुलकित होते अंग।
उत्तम जन यदि साथ हो , जीवन है सत्संग।।

3-जीवन
हाथ बढ़े सहयोग को , समझे सबका मर्म।
मानव जीवन तब सफल , अगर नेक हो कर्म।।

Saturday, 30 May 2020

दोहे....राग,अनुराग,वैराग्य

30/ 05/ 2020
1-राग
शब्द गीत लय ताल हो , और समय की माप।
सात सुरों से ही सजे , राग तान आलाप।।

2-अनुराग
चरण कमल प्रभु पादुका , लिए भरत सब त्याग।
राम चरण में ही दिखा , केवट का अनुराग।।

3-वैराग्य
मन में हो वैराग्य सा , समझे जन की पीर।
समझ उसे संसार का , सबसे बड़ा अमीर।।

Thursday, 28 May 2020

देवता....28/05/2020


मन मंदिर हो देवता , मृदु वाणी हो फूल।
फैले सदा सुवास बन , स्वयं कर्म अनुकूल।।

पत्थर के ये देवता , रहते हरदम मौन।
कहते मानव कर्म कर , मत पूछो मैं कौन।।

नेक कर्म करना मनुज , करना कभी न भूल।
जिसे देख कर देवता , दूर करे पथ शूल।।

दोहा.....कलयुग


27 मई 2020
कहते हैं कुछ और ही , करते हैं कुछ और।
सोच समझ मन मीत रे , ये कलयुग का दौर।।

Tuesday, 26 May 2020

उपहार.......26/05/2029

द्वेष कपट अब हो नहीं , सबके दिल में प्यार।
सेवा भाव उदारता , ये अनुपम उपहार।।

जब मैं होता हूँ व्यथित , करती मुझे दुलार।
दीदी का ये प्यार है , ईश्वर का उपहार।।

Monday, 25 May 2020

कुण्डलिया25/05/2020


थकती चिड़िया है नहीं , गाती मीठे गान।
खुश रहती है वो सदा , है छोटी सी जान।
है छोटी सी जान , रोज छप्पर पर आती।
रखे समय का ध्यान,सुबह ही हमें जगाती।
करती दिन भर काम,सूर्य से पहले उठती।
बच्चे करें सवाल,क्यों नहीं चिड़िया थकती।

Sunday, 24 May 2020

उत्सव शब्द पर दोहा


24/05/2020
उत्सव तो संगीत है , झूम उठे उर तार।
राधा सुनकर बाँसुरी , गई हृदय से हार।।

Saturday, 23 May 2020

कुण्डलिया


यह कैसा मजदूर है , जीवन से मजबूर।
पैदल पैदल जा रहा , जिसका घर है दूर।।
जिसका घर है दूर , घड़ी मुश्किल ये आई।
जाना इसको गाँव , संग बच्चे पितु माई।
क्रंदन करते पुत्र , पिता के पास न पैसा।
है जीवन से जंग , समय आया यह कैसा।।

भक्ति रस


भक्ति भाव हर शब्द में , बहती है रसधार।
तुलसी कृति जो भी पढ़ा , उपजा मन सुविचार।।

श्रद्धा से पत्थर बना ,जन जन का भगवान।
बिन श्रद्धा मिलते नहीं , लाख लगाओ ध्यान।।

भक्ति भाव उर में भरो , करो ईश का ध्यान।
किया न प्रभु गुणगान जो , वो है मरा समान।।

लता पुकारे रात-दिन , कहाँ छुपे प्रभु आप।
सभी घरों में कैद हैं , हर लो अब संताप।।

संकट में हैं ये धरा , कष्ट हरो हनुमान।
सकल जगत अंधेर में , कृपा करो भगवान।।

शृंगार रस


22/05/
मृदु वाणी हो अधर पर , आँखों में हो नेह।
आभूषण हो सत्य का , करे सुशोभित देह।।

एक नार ऐसी दिखी , जिसके नैन विशाल।
चाल चले गज के सदृश , सबको करे निहाल।।


मृग लोचन है मदभरी ,और गुलाबी गाल।
कौन नार, ये सुंदरी , मन में उठे सवाल।।


अनुपम कृति ये प्रकृति है , दूजा नारी रूप।
सृष्टि कहाँ इनके बिना , दोनों रूप अनूप।।

कोमल है ये पुष्प-सी , और नैन में नेह।
लगे अधर सुंदर सुधा , भूषण चमके देह।।


गुनाह

23/05
विधा-दोहा
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मात-पिता के वचन का , करना तुम निर्वाह।
उन चरणों में धाम है , मत कर कभी गुनाह।।

पाक रहे ये जिंदगी , करती हूँ आगाह।
महनत से सब कुछ मिले , करना नहीं गुनाह।।

खुद को मत छोटा समझ , मन में रख उत्साह।
हीन समझना स्वयं को , सबसे बड़ा गुनाह।।

करना नहीं गुनाह तू , पाप-पुण्य पहचान।
बनो न भागी नर्क का , रखो कर्म का ध्यान।।

गलती से ही सीखता , हर कोई इंसान।
बचना मगर गुनाह से , सही गलत पहचान।।

भोला अरु मासूम रह , रखना स्वच्छ निगाह।
दूषित मन करना नहीं , करके कोइ गुनाह।।

ऐसी जगह नहीं जहाँ , होते नहीं गुनाह।
न्याय हमेशा ही मिले , यही मनुज की चाह।।

मंदिर मस्जिद ही नहीं , प्रभु तो है चहुँ ओर।
करता मनुज गुनाह तो , देते दंड कठोर।।

मुझसे नजरें चार कर , मुझको किया तबाह।
प्यार किया था बस उन्हें , फिर क्या किया गुनाह।।

कंचन लता चतुर्वेदी
वाराणसी  (उत्तर प्रदेश)

Friday, 22 May 2020

आंसू,गाँव, मजदूर

22/05/2020
1-आँसू
पलकों में आँसू भरे , बनकर गिरते नीर।
कोई समझे नीर है , कोई समझे पीर।।

2-गाँव
बिगड़ी हालत गाँव की , उजड़ गया सब बाग।
नहीं छाँव दिखता कहीं , सूरज उगले आग।।

3-मजदूर
बसी बसाई जिंदगी , छोड़ दिये मजदूर।
जाना इनको गाँव है , अब होकर मजबूर।।


Monday, 18 May 2020

दोहे...श्रृंगार, धरती

18/05/2020
कोमल है ये पुष्प-सी , और नैन में नेह।
लगे अधर सुंदर सुधा , भूषण चमके देह।।

धरती के इस जिस्म पर , मैं हूँ एक लिबास।
कोमल कोमल गात है , कहते मुझको घास।।


Saturday, 16 May 2020

कुण्डलिया



हिम्मत चिड़िया की गजब ,कभी न मानी हार।
तिनका तिनका जोड़कर,दिया हवा को मार।।
दिया हवा को मार,सफलता हासिल कर ली।
किया विजय का गान,हीय में खुशियाँ भर ली।
रखे समय का ध्यान,बड़ी है इसकी कीमत।
है छोटी सी जान,मगर कितनी है हिम्मत।

दोहे-कर्म ,धर्म,मर्म

16/05/2020/शनिवार
1-कर्म
मानव तन दुर्लभ मिले , मत बनना तू शूल।
यश  फैले निज कर्म से , बनो सुवासित फूल।।

2-धर्म
कर्ज उतारा कर्ण ने , किया धर्म से बैर।
साथ दिया था मित्र का , कर अपनो को गैर।।

3-मर्म
कोयल बैठी मौन है , कौवे करते शोर।
करते बातें मर्म की , बोले वचन कठोर।।


Thursday, 14 May 2020

दोहे


बाते करता सत्य की , खुद ही बोले झूठ।
सत्य वचन कड़वा लगे , पल पल जाये रूठ।।

निर्मल उसका नाम है , रखता मन में मैल।
दिखे नहीं संवेदना , लगता उर से शैल।।

Tuesday, 12 May 2020

चुनौती...12/05/2020


विकट चुनौती का चलो , ढूंढे कोई तोड़।
जीवन है संघर्ष का , देना मत पथ छोड़।।


जलती लौ-सी जिंदगी , मत जीवन से हार।
पवन चुनौती दे रहा , इसको कर स्वीकार।।

Saturday, 9 May 2020

तुलसी,सूर,कबीर

भक्ति भाव रसपूर्ण है , भाषा सरल सुबोध।
रामचरित मानस रचे , करके तुलसी शोध।।

काम क्रोध मद लोभ सब , तज कर तुलसी संत।
रामचरित मानस रचे , महिमा बड़ी अनंत।।

कथा कहे श्री राम की , किये राम से प्रीत।
रामचरित तुलसी रचे , लिए हृदय को जीत।।

जन जन के उर में बसे , तुलसी के श्री राम।
जो भजता श्री राम को , मिलता है सुख धाम।।

तुलसी सूर कबीर जी , तीनो संत सुजान।
भगवन का गुणगान कर , बांटा सबको ज्ञान।।

दोहे संत कबीर के , देते हैं संदेश।
दीपक जलता ज्ञान का , मिटता मन का क्लेश।।

गुरू बड़ा है ईश से , कहते यही कबीर।
ज्ञान ज्योति गुरु से जले , बदले जो तकदीर।।

पाखण्डों को काटते ,  ऐसे संत कबीर।
भेद भाव से मुक्त हो , मगहर तजा शरीर।।

तरुवर खाता फल नहीं , नदी न पीती नीर।
सज्जन तो सद्ज्ञान से , हरते सबके पीर।।
09/05/2020