मेरी भावनाएं.../कंचनलता चतुर्वेदी
Wednesday, 26 August 2020
मुक्तक
2122 2122 2122 212
दोस्तों के बीच गद्दारी कहाँ से आ गई।
था घना ये प्रेम मक्कारी कहाँ से आ गई।
फासला बढ़ने लगा था पाटना जिसको हमें,
भाइयों के बीच लाचारी कहाँ से आ गई।
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